ग्लेशियर पब्लिक स्कूल में संस्कृत भाषा पर एकदिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया।
देहरादून।
ग्लेशियर पब्लिक स्कूल में संस्कृत भाषा पर एकदिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमें बाह्य विशेषज्ञ डॉ. आनन्द जोशी असिस्टेंट प्रोफेसर स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के द्वारा संस्कृत भाषा के उपयोग और उसकी वैज्ञानिकता पर प्रकाश डाला गया। कक्षा 9वीं के छात्र छात्राओं को सम्बोधित करते उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, विज्ञान (गणित, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद) और दर्शन की अमूल्य धरोहर है। वर्तमान में भारत के उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश राज्यों ने संस्कृत को अपनी द्वितीय आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया है।

इसका उपयोग ऋग्वेद और अन्य वेदों की रचना में हुआ था (लगभग 1500 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व)। लौकिक (शास्त्रीय) संस्कृत ईसा पूर्व 5वीं शताब्दी के आसपास महान व्याकरणविद् महर्षि पाणिनि ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ ‘अष्टाध्यायी’ के माध्यम से इस भाषा को नियमबद्ध और मानकीकृत किया। पाणिनि के बाद की संस्कृत को ‘लौकिक संस्कृत’ कहा जाता है। संस्कृत को सीखने की सरल विधि के द्वारा छात्रों में संस्कृत सीखने और बोलने की रुचि जागृत हुई। उन्होंने बताया कि हिंदी, बंगाली, मराठी, गुजराती, पंजाबी जैसी अधिकांश आधुनिक भारतीय भाषाएं सीधे तौर पर संस्कृत से ही विकसित हुई हैं। दक्षिण भारतीय (द्रविड़) भाषाओं पर भी इसका गहरा प्रभाव है। संस्कृत का साहित्य, संगीत और कला आदि विधाएं आज भी आदि काल से संस्कृत सीखने का एक सुगम साधन हैं। इसके अलावा संस्कृत में व्यवसाय और रोजगार के अनेक अपार संभावनाएं हैं। संस्कृत में अध्यापन, पत्रकारिता, सेना भर्ती, सिविल परीक्षा, भाषा सलाहकार, उच्च शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान एस्ट्रोलॉजी, एस्ट्रोनॉमी,आदि अनेक क्षेत्रों में अपने करियर को बनाया जा सकता है। व्याख्यान में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री रवि नेगी के साथ संस्कृत के अध्यापक अध्यापिकाएं भी उपस्थित थे।