लॉक डाउन : स्कूलों द्वारा फीस मांगे जाने पर अभिभावक पहुंचे हाईकोर्ट


देहरादून। जैसा कि ज्ञात है कोरोना वायरस लॉक डाउन की वजह से सभी आम जनमानस नाजुक दौर से गुजर रहा है। जिसको देखते हुए NAPSR द्वारा संपूर्ण भारत के अभिभावकों की चिंता करते हुए एक आग्रह पत्र दिनांक 25 मार्च 2020 को Email द्वारा माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री/माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड/माननीय शिक्षा मंत्री उत्तराखंड को भेजा गया था। जिसमे अनुरोध किया गया था कि कोरोना की आज की स्थिति और अभिभावकों की आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार द्वारा निजी स्कूलों को निर्देशित किया जाए की सभी स्कूल अभिभावकों से एक माह की फीस न लें और अगले माह की फीस के लिए भी समय मे थोड़ा ढील दें । किन्तु उत्तराखंड सरकार ने विगत 22 अप्रैल को ही दूसरा शासनादेश जारी करते हुए निजी स्कूलों को फीस वसूली की छूट देकर यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार पूंजीपतियों के साथ खड़ी है और आम जनता की परेशानियों से उन्हें कोई सरोकार नही है। एक बार फिर से सरकार ने उत्तराखंड की जनता के साथ छल करते हुए अपनी अभिभावकों के प्रति संवेदन हीनता को दर्शाया है जिसके फल स्वरूप निजी स्कूलों ने न सिर्फ अपनी मनमानियों के अनुरुप अभिभावकों को फीस जमा करने के लिए मैसेज करने शुरू कर दिए न सिर्फ अभिभावकों से ट्रांसपोर्ट चार्ज, बिल्डिंग फंड, अदर ड्यूज, एक्टिविटी चार्ज, कम्प्यूटर चार्ज, लाइब्रेरी चार्ज मांगे गए बल्कि अभिभावकों को अपनी बंधी बंधाई किताबो की दुकानों पर जाने को कहा गया और कुछ स्कूलों ने तो स्कूल से आकर भी किताबें ले जाने के मैसेज कर डाले। इस लॉक डाउन के बीच बहुत से स्कूलों ने नियम और कानून की धज्जियाँ उड़ाते हुए न सिर्फ फीस व्रद्धि करी बल्कि नए एडमिशन भी लिए जिसमे शिकायत किये जाने पर जिलाधिकारी द्वारा कुछ स्कूलों को नोटिस भेजने के साथ ही जांच के आदेश दिए गए। किन्तु ये सबको जानकारी है कि सिर्फ जांच और नोटिस का खेल ही इन स्कूलों के लिए जीत और जिद की वजह बना हुआ है। यदि आज तक किसी भी एक निजी स्कूल पर ठोस कार्यवाई हो जाती तो कोई भी स्कूल शासनादेश की धज्जियां उड़ाने की हिम्मत न करता । एसोसिएशन के अध्यक्ष आरिफ खान के अनुसार जब NAPSR द्वारा बार-बार आग्रह करने के बावजूद भी अभिभावकों के हित के विषय मे उत्तराखंड सरकार और शिक्षा विभाग ने संज्ञान नही लिया तो कल दिनांक 25 अप्रैल को नैशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरिफ खान और महासचिव अधिवक्ता सुदेश उनियाल की ओर से नैनीताल हाई कोर्ट मे लॉक डाउन चलने तक अभिभावकों की फीस माफी एक ऑनलाइन जनहित याचिका डाल दी गयी है जिसमे स्पष्ट किया गया है कि जो सरकारी वेतन भोगी हैं उनसे भी सिर्फ मासिक ट्यूशन फीस के अलावा कोई अन्य फीस लेने के लिए स्कूल बाध्य न करें । अब ये माननीय उच्च न्यायालय के विवेक पर निर्भर है कि वो इस जनहित याचिका पर कब और कैसे संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को किया निर्देशित करती है। वहीं पूरे मामले को लेकर शिक्षा मंत्री अरविन्द पांडे ने अब तक कोई भी बयान नहीं दिया है। जो कि अपने आप में कई सवालिया निशान खड़ा करता है।