गौ पलकों पर बड़ी आर्थिक चोट कर रहा है प्रदूषण बोर्ड : महंत दुर्गादास


संदीप ढौंडियाल
देहरादून। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एक अहम दिशा निर्देश जारी किया गया है। जिसमें नदी और रिहायशी क्षेत्रों के नजदीक अब किसी भी प्रकार की डेरी और गौशाला खोले जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। बोर्ड का कहना है कि गाय या पशुओं के मल मूत्र से पर्यावरण को लगातार नुकसान हो रहा है। जिस कारण से यह दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। वहीं इस दिशा निर्देश पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण कुंभ मेला प्रबंधक महंत दुर्गादास महाराज जी ने कहा कि इस निर्णय से गौ पालन में कमी दर्ज की जाएगी। उन्होंने कहा कि पशु अगर नदी के किनारे पानी पीने नहीं जाएंगे तो फिर कहां जाएगी। उन्होंने इस फैसले को व्यावहारिक ना बताते हुए इसमें बदलाव की मांग की है। महंत दुर्गादास ने कहा कि एक ओर तो सरकार गौ हितैषी बनती है वहीं दूसरी ओर इस तरह के प्रतिबंध कहीं ना कहीं गौ पलकों पर बड़ी आर्थिक चोट करेगी। उन्होंने कहा अगर गाय या पशुओं को घर के आस-पास या नदी के किनारे चराने को ना रखें तो आखिर कहां रखेंगे। वहीं माँ योग शक्ति दिव्य धाम आश्रम ट्रस्टी एवं कोषाध्यक्ष इंद्र मोहन मिश्रा ने इस निर्देश को लेकर कहा कि यह बात पर सरकार को बतानी चाहिए कि अगर हम पशुओं को जंगलों में रखेंगे तो क्या सरकार रखने देगी। यदि जंगली जानवर हमारे पशुओं को खा लेंगे तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। महंत दुर्गादास सहित इंद्र मोहन मिश्रा ने प्रदूषण बोर्ड को एक बार इस निर्देश पर पुनर्विचार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि बोर्ड को व्यावहारिक फैसले लेने के साथ ही परिभाषा को ठीक करना चाहिए। बता दें बोर्ड की ओर से पर्यावरण संरक्षण के लिए डेरी और गौशालाओं के लिए यह निर्देश जारी किए गए हैं कि मल मूत्र के निष्पादन की हेतु उचित व्यवस्था की जाए। निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिदिन एक पशु पर 150 लीटर से ज्यादा पानी की खपत नहीं की जानी चाहिए।