सरकार के पास सही शब्द के चयन की बुद्धि नहीं है तो वह संतों की शरण में आये : महंत नरेंद्र गिरी महाराज

संदीप ढौंडियाल (मुख्य संवाददाता)
देहरादून। हरकी पैड़ी ब्रह्म कुंड, सर्वानंद घाट से लेकर डैम कोठी और दक्ष मंदिर तक बहने वाली गंगा के भाग को स्क्रैप चैनल से हटा कर मुख्य गंगा घोषित करने की मांग को लेकर अखाड़ा परिषद अधयक्ष श्री महंत नरेंद्र गिरी महाराज जी ने मोर्चा खोला है। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द से जल्द इस मुद्दे पर विचार कर इस पर यथाशीघ्र निर्णय लें। महंत नरेंद्र गिरी ने मुखर होते हुए कहा कि क्या आने वाले कुम्भ मेले में साधु संत एक स्क्रैप (नाला) में स्नान करेंगे। उन्होंने कहा कि पूरा अखाड़ा परिषद और संत समाज इस गलती को ठीक करने का मौका सरकार को दे रही है। इसलिए सरकार को चाहिए कि सभी श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हुए मां गंगा के सभी घाटों को गंगा ही माने। महंत ने मांग की है कि शासन जल्द से जल्द ऐसी परिभाषा को संशोधित कर सही शब्द का प्रयोग करे। उन्होंने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि उनके नेता इस विषय पर राजनीति कर रहे हैं। लेकिन इसे सुलझाने और ठीक करने की बात नहीं करते हैं। महंत ने कहा कि सरकार कम से कम वार्ता के लिए तो आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि अगर सरकार के पास सही शब्द के चयन की बुद्धि नहीं है तो वह संतों की शरण में आयें।
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के तहत राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल ने मां गंगा जी के 200 मीटर तक सभी निर्माण कार्यों को तोड़ने के आदेश राज्य सरकार को दिए थे। इस आदेश से हरिद्वार में कई भवन ध्वस्त होते। तब पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार ने फैसला लिया कि मकानों को ध्वस्तिकरण से बचाने के लिए मां गंगा जी के प्रवाह को एक तकनीकी नाम (स्क्रैप/नाला) दिया जाए। जिससे ध्वस्तिकरण तो रुक गया मगर तत्कालीन सरकार एक बड़ी चूक कर गयी। मौजूदा समय में हरीश रावत ने अपनी इस गलती को मानते हुए माफी भी मांगी थी। साथ ही उन्होंने कुछ दस्तावेजों की प्रतियां अखाड़ा परिषद को सौंपते हुए सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द स्क्रैप शब्द को हटाया जाए।