वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय एवं नाइलिट के बीच डिजिटल कौशल विकास एवं प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षण को प्रोत्साहन हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर
नई दिल्ली, । उच्च शिक्षा में डिजिटल नवाचार, कौशल विकास तथा प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षण को नई दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (वीएमएसबीयूटीयू), देहरादून एवं राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (नाइलिट) के बीच नई दिल्ली स्थित नाइलिट के कॉर्पोरेट कार्यालय में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
समझौता ज्ञापन पर विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. (डॉ.) तृप्ता ठाकुर तथा नाइलिट की ओर से महानिदेशक डॉ. एम. एम. त्रिपाठी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर नाइलिट के निदेशक (योजना कौशल विकास) डॉ. आलोक त्रिपाठी एवं वीएमएसबीयूटीयू के प्रौद्योगिकी संकाय के सहायक प्राध्यापक एवं समन्वयक डॉ. विशाल रमोला सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस समझौते के अंतर्गत दोनों संस्थान डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास तथा प्रौद्योगिकी समर्थित अधिगम के क्षेत्र में संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। सहयोग के प्रमुख आयामों में क्रेडिट आधारित ऑनलाइन शिक्षण, राष्ट्रीय कौशल योग्यता रूपरेखा (NSQF) के अनुरूप पाठ्यक्रम, आवश्यकतानुसार विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा नाइलिट डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभिन्न डिजिटल स्किलिंग पहल संचालित करना शामिल है।
इस साझेदारी के माध्यम से विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं अन्य शिक्षार्थियों को उद्योग की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किए गए उच्च गुणवत्ता वाले पाठ्यक्रमों तक सहज पहुँच प्राप्त होगी। इससे उनकी डिजिटल दक्षताओं का विकास होगा, रोजगारपरक कौशल सुदृढ़ होंगे तथा बदलती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि होगी।
यह रणनीतिक सहयोग उच्च शिक्षा में नवाचार को प्रोत्साहित करने, अकादमिक जगत एवं उद्योग के मध्य प्रभावी समन्वय स्थापित करने तथा आधुनिक तकनीकी दक्षताओं से युक्त भविष्य के कुशल मानव संसाधन के निर्माण की दिशा में दोनों संस्थानों की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह पहल राष्ट्रीय कौशल विकास के उद्देश्यों तथा डिजिटल अर्थव्यवस्था की उभरती आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षार्थियों को लचीले, गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारोन्मुख शिक्षण अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।