उत्तराखंड सरकार कर रही है, भारत के संविधान के आर्टिकल 363 की अवेहलना


देहरादून।। हरिद्वार माँ गंगा जी को हर-की-पैड़ी पर नहर/सकैप चैनल बताकर उत्तराखंड सरकार भारत के संविधान की भी धज्जियां उड़ा रही है। जिस कार्य को ब्रिटिश सरकार भी नही कर पाई। वह कार्य पिछली काँग्रेस सरकार के शाशन में 16 दिसंबर 2016 को अध्यादेश जारी करते हुए कर दिया। माँ गंगा, हिंदुओं की आस्था व विश्वास एवं हिन्दू धर्म के साथ जो होली खेली गई है। उसके लिये माँ गंगा कभी भी उनको माफ नही कर सकती है। पं मदन मोहन मालवीय जी को भी ब्रिटिश सरकार पर संदेह था कि वह 1916 के समझौते के साथ कभी भी छेड़-छाड़ कर सकते थे। लेकिन ब्रिटिश सरकार ने तो नही पर कांग्रेस सरकार ने इस घोर पाप को समझौते की 100वी वर्षगाँठ पर कर दिखाया।

अविरल गंगा रक्षा समझौते-1916 में मुख्य रूप से “हरिद्वार शहर व हर-की-पैड़ी को जल प्रवाह करने वाली माँ गंगा जी की किसी भी धारा को नहर का स्वरूप व नहर के नाम से” ना पुकारने के लिए समझौता हुआ था। यह समझौता आज वर्तमान में भी भारत के संविधान के आर्टिकल 363 के तहत सुरक्षित चला आता है। इस ब्रिटिश सरकार के साथ समझौते में अनमोल वाशिष्ठ के पड़-दादा श्री सरदार इंद्राजसिंह जी (सरदार रामचन्द्र जी के, पंडा ज्वालापुर), श्रीमहन्त लक्ष्मणदास जी (देहरादून, गुरुराम राय आश्रम) व अनेको राजा-महाराजा जिसमे जयपुर, पटियाला, ग्वालियर, बीकानेर, दरभंगा नरेश बैठे थे।

*अनमोल वाशिष्ठ ने उत्तराखंड भाजपा सरकार को हिदायत दी कि “कांग्रेस सरकार की तरह माँ गंगा 2022 में सत्ता पलट ना कर दे। जिस तरीके से माँ गंगा जी का श्राप हरीश रावत जी को अपनी दोनों सीट से हरवा गया। भाजपा के भी यही दिन ना आ जाएं। भाजपा सरकार को इस घोर जगण्य पाप का भागीदार ना बनते हुए, तुरंत इस अध्यादेश को रद्द कर देना चाहिये और हमे हर-की-पैड़ी पर पूर्ण माँ गंगा जी का दर्जा चाहिए, हम किसी टेक्निकल भाषा को नही जानते है”*

*अनमोल वाशिष्ठ ने बोला की “17 जून को हाईकोर्ट से उनकी जनहित याचिका पर आदेश आया था। हाई कोर्ट का आदेश व अपनी रिप्रजेंटेशन 21 जून को प्रेषित कर चुका हूं। सरकार इस पर जल्द से जल्द हाईकोर्ट के आदेश अनुसार उनकी रिप्रजेंटेशन पर फैसला दे। फैसला लेने के लिए 51 दिन की समयसीमा उत्तराखंड सरकार को दी गयी थी। अन्यथा अपने केस को मैं सुप्रीम कोर्ट लेकर जाऊंगा। सुप्रीम कोर्ट की तैयारी पूरी कर ली गई है।